मुंबई, भारत — Costa Savings मोबाइल एप्लिकेशन और उसकी मूल कंपनी Costa Forex से जुड़ा एक बड़े पैमाने का कथित निवेश घोटाला सामने आया है, जिसमें देशभर के हजारों निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। इस पूरे मामले के केंद्र में ऐप के संस्थापक Sahil Ali हैं, जिनके वर्तमान में Dubai में होने की सूचना है।
ऊंचे रिटर्न के वादे और तेजी से बढ़ता नेटवर्क
पुलिस में दर्ज कई शिकायतों और निवेशकों के बयानों के अनुसार, Costa Forex ने वर्ष 2021 में खुद को एक प्रोफेशनल फॉरेक्स ट्रेडिंग कंपनी के रूप में पेश किया। इसके बाद 2022 में Costa Savings ऐप लॉन्च किया गया, जिसने हर महीने 30 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न का दावा किया।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के वादे अपने आप में संदिग्ध होते हैं, लेकिन आक्रामक डिजिटल मार्केटिंग, प्रोफेशनल ब्रांडिंग और सोशल मीडिया प्रचार के चलते बड़ी संख्या में खुदरा निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया।
सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर कनेक्शन से बढ़ा भरोसा
ऐप की विश्वसनीयता को उस समय बड़ा बल मिला जब पूर्व भारतीय क्रिकेटर Suresh Raina कथित तौर पर Costa Savings से जुड़े प्रचार कंटेंट में नजर आए। कई निवेशकों ने जांच एजेंसियों को बताया कि रैना की मौजूदगी के कारण उन्हें लगा कि प्लेटफॉर्म पूरी तरह भरोसेमंद है।
इसके अलावा, साहिल अली की सोशल मीडिया प्रोफाइल पर लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर्स और पॉडकास्ट ब्रांड BeerBiceps जैसे नामों से जुड़े इंटरैक्शन भी निवेशकों के भरोसे का कारण बने।
शुरुआती भुगतान, फिर अचानक रोक
शुरुआती महीनों में निवेशकों को समय पर भुगतान मिलता रहा, जिससे कई लोगों ने अपना पैसा दोबारा निवेश किया और रकम बढ़ाई। लेकिन नवंबर 2022 में स्थिति बदल गई, जब पेमेंट गेटवे Razorpay ने संदिग्ध लेनदेन पैटर्न के चलते Costa Forex के खातों को सस्पेंड कर दिया।
इसके बाद निवेशकों के लिए निकासी पूरी तरह बंद हो गई। कंपनी की ओर से “तकनीकी समस्या” और “नए पेमेंट गेटवे की प्रक्रिया” जैसे कारण बताए जाते रहे।
असली फॉरेक्स ट्रेडिंग के सबूत नहीं
2023 के मध्य में सामने आई एक लीक जांच रिपोर्ट के अनुसार, Costa Forex से जुड़े वास्तविक फॉरेक्स ट्रेडिंग के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले। जांच अधिकारियों का आरोप है कि नए निवेशकों का पैसा पुराने निवेशकों को भुगतान करने में इस्तेमाल किया गया — जो पोंजी स्कीम की प्रमुख पहचान मानी जाती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि निवेशकों की रकम का बड़ा हिस्सा लग्जरी खरीदारी, महंगी गाड़ियों और निजी खर्चों में लगाया गया।
दुबई पलायन और हवाला लेनदेन के आरोप
अनुमान है कि कुल लगभग ₹70 करोड़ निवेश के रूप में जुटाए गए, जिनमें से करीब ₹40 करोड़ सीधे साहिल अली द्वारा निकाले जाने का आरोप है। अप्रैल 2023 तक कंपनी के कार्यालय बंद हो गए, कर्मचारियों को हटा दिया गया और साहिल अली के भारत छोड़ने की बात सामने आई।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ रकम हवाला नेटवर्क के जरिए विदेश भेजी गई और पारिवारिक खातों के माध्यम से ट्रांसफर की गई। ये आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं।
निवेशकों का आक्रोश, जांच जारी
सोशल मीडिया पर प्रभावित निवेशकों की बड़ी संख्या न्याय की मांग कर रही है। कई लोगों ने गंभीर आर्थिक संकट की बात कही है। कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए फंड ट्रैकिंग और संभावित प्रत्यर्पण की संभावना तलाश रही हैं।
फिलहाल, किसी भी आरोपी को दोषी ठहराया नहीं गया है और सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

