Neeraj Chopra ने पेरिस ओलंपिक में जीता रजत, खंडरा में मनाया दीवाली जैसा माहौल

Paris Olympics में गोल्डन ब्वाय (Neeraj Chopra) ने भले ही स्वर्ण पदक नहीं जीता, लेकिन रजत पदक जीतने के बाद उनके पैतृक गांव खंडरा में जैसे दीवाली का माहौल बन गया। फाइनल मुकाबले से पहले ही गांववासियों का उत्साह देखने योग्य था। आधी रात को भी लोग गांव में लगी बड़ी स्क्रीन पर Chopra ने चौथे प्रयास में भी फाउल किया और 89.45 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। उनके इस का समर्थन करते नजर आए, मानो वे पेरिस में ही मौजूद हों। रजत पदक की खुशी में गांव में लड्डू बांटे गए और आतिशबाजी चलाकर माहौल को और उत्साहपूर्ण बना दिया।

Neeraj Chopra ने पेरिस (Olympics) में अपने प्रदर्शन के लिए आठ माह तक तुर्की में कठोर अभ्यास किया। यह लगातार दूसरा ओलंपिक था जब उन्होंने पदक जीता, और इस बार उन्होंने रजत पदक हासिल कर नया इतिहास रचा। हालांकि, वे टोक्यो (Olympics) के स्वर्ण पदक विजेता प्रदर्शन को नहीं दोहरा सके और उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा।

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Paris Olympics में पाकिस्तान के (Nadeem) ने दूसरे प्रयास में 92.97 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया। (Neeraj Chopra) ने दूसरे प्रयास में 89.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 88.54 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे। नीरज और नदीम दोनों ने पहले प्रयास में फाउल किया था, लेकिन (Nadeem) ने अपने दूसरे प्रयास में ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़कर स्वर्ण पदक की ओर बढ़त बना ली। नीरज ने भी दूसरे प्रयास में अपने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, लेकिन वे नदीम को पीछे नहीं छोड़ सके।

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नीरज चोपड़ा इस बार केवल एक ही सफल प्रयास कर सके और छह में से पांच प्रयास फाउल हुए। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने 87.58 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था। इस बार वे टोक्यो की तुलना में अधिक दूर भाला फेंकने में सफल रहे, लेकिन स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर पाए। बावजूद इसके, वे आजादी के बाद एथलेटिक्स में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। इससे पहले 1900 में नॉर्मन प्रिचर्ड ने एथलेटिक्स में दो पदक जीते थे, लेकिन वे ब्रिटिश मूल के थे।

Neeraj Chopra ने चौथे प्रयास में भी फाउल किया और 89.45 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल भारतीय खेल जगत को गर्वित किया, बल्कि गांव खंडरा में उनकी जीत की खुशी का माहौल बना दिया।

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