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लिट्टी-चोखा कभी सैनिकों का भोजन था, बिना खराब हुए यह लंबी यात्रा में ऊर्जा देता था।
पूरन पोली मूलतः त्योहारों का व्यंजन है, जो मराठी संस्कृति में समृद्धि का प्रतीक है।
यह पकवान युद्ध के समय बना था, जब सैनिक धीमी आँच पर बाटी पकाते थे।
सध्या केरल के ओणम पर्व का हिस्सा है, जिसमें हर पकवान जीवन के विभिन्न रंगों का प्रतीक है।
मिष्टी दोई पहले मंदिरों में प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता था, जिससे यह खास महत्व रखता है।
यह व्यंजन किसान वर्ग की मेहनत और पंजाब के समृद्ध खेतों की पहचान है।
ढोकला का इतिहास गुजरात के सूखे मौसम में बचने और टिकाऊ भोजन बनाने की विधि से जुड़ा है।
इडली का इतिहास दक्षिण भारत में मंदिरों में नवरात्रि उपवास के दौरान प्रसाद के रूप में शुरू हुआ।
यह व्यंजन फारसी प्रभावों से आया है, जिसे कश्मीर में खास मसालों के साथ अनुकूलित किया गया।
अवध के नवाबों के दरबार में यह पकवान भूख मिटाने के साथ शाही स्वाद का प्रतीक बना।