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स्कंद पुराण के अनुसार, केदारनाथ और काशी दोनों पवित्र स्थल है, जहाँ यात्रा करने से पुण्य मिलता है।
केदारनाथ में शिवलिंग के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है, यह पापों का क्षय करने वाला माना गया है।
काशी को मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति का धाम कहा गया है, जहाँ भगवान शिव स्वयं वास करते है।
दोनों स्थानों पर भगवान शिव का आशीर्वाद मिलने का महत्व है, जिससे सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
केदारनाथ में स्थित शिवलिंग तप और साधना का प्रतीक है, जहाँ भगवान शिव की तपस्या से मनोवांछित फल मिलता है।
काशी में पवित्र गंगा स्नान और विधिवत पूजा-अर्चना से आत्मा की शुद्धि होती है।
केदारनाथ पहुँचने की कठिन यात्रा व्यक्ति की श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती है, जिससे आत्मिक शांति मिलती है।
काशी में अस्सी और मणिकर्णिका घाटों पर विशेष पुण्य प्राप्ति का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है।
स्कंद पुराण में बताया गया है कि केदारनाथ और काशी, दोनों की यात्रा का पुण्य भिन्न होते हुए भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।